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शल्य पर्व
अध्याय १
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वैशम्पाय़न उवाच
तवाप्येते महाराज रथिनो नृपसत्तम |  ३५   क
अक्षौहिणीनां सर्वासां समेतानां जनेश्वर |  ३५   ख
एते शेषा महाराज सर्वेऽन्ये निधनं गताः ||  ३५   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति