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शान्ति पर्व
अध्याय १५४
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युधिष्ठिर उवाच
महानय़ं धर्मपथो वहुशाखश्च भारत |  ३   क
किं स्विदेवेह धर्माणामनुष्ठेय़तमं मतम् ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति