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भीष्म पर्व
अध्याय ८८
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सञ्जय़ उवाच
तदनीकमनाधृष्यं पालितं लोकसत्तमैः |  २३   क
आतताय़िनमाय़ान्तं प्रेक्ष्य राक्षससत्तमः |  २३   ख
नाकम्पत महावाहुर्मैनाक इव पर्वतः ||  २३   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति