शान्ति पर्व  अध्याय ८९

युधिष्ठिर उवाच

यदा राजा समर्थोऽपि कोशार्थी स्यान्महामते |  १   क
कथं प्रवर्तेत तदा तन्मे व्रूहि पितामह ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति