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अनुशासन पर्व
अध्याय ५२
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युधिष्ठिर उवाच
तदस्य सम्भवं राजन्निखिलेनानुकीर्तय़ |  ४   क
कौशिकाच्च कथं वंशात्क्षत्राद्वै व्राह्मणोऽभवत् ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति