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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८९
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युधिष्ठिर उवाच
सञ्चिन्तय़ामि वार्ष्णेय़ सदा कुन्तीसुतं रहः |  ४   क
किं नु तस्य शरीरेऽस्ति सर्वलक्षणपूजिते |  ४   ख
अनिष्टं लक्षणं कृष्ण येन दुःखान्युपाश्नुते ||  ४   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति