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द्रोण पर्व
अध्याय १६१
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सञ्जय़ उवाच
द्रुपदस्य ततः पौत्रास्त्रय़ एव विशां पते |  ३०   क
चेदय़श्च महेष्वासा द्रोणमेवाभ्ययुर्युधि ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति