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भीष्म पर्व
अध्याय ८९
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सञ्जय़ उवाच
धूम्रारुणं रजस्तीव्रं रणभूमिं समावृणोत् |  २२   क
नैव स्वे न परे राजन्समजानन्परस्परम् ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति