आदि पर्व  अध्याय ५८

जनमेजय़ उवाच

यदर्थमिह सम्भूता देवकल्पा महारथाः |  २   क
भुवि तन्मे महाभाग सम्यगाख्यातुमर्हसि ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति