वन पर्व  अध्याय ३७

वैशम्पाय़न उवाच

युधिष्ठिर महावाहो वेद्मि ते हृदि मानसम् |  २२   क
मनीषय़ा ततः क्षिप्रमागतोऽस्मि नरर्षभ ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति