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द्रोण पर्व
अध्याय ८९
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धृतराष्ट्र उवाच
व्यश्वनागरथान्दृष्ट्वा तत्र वीरान्सहस्रशः |  ३४   क
धावमानान्रणे व्यग्रान्मन्ये शोचन्ति पुत्रकाः ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति