सौप्तिक पर्व  अध्याय ९

कृप उवाच

येनाजौ निहता भूमावशेरत पुरा द्विषः |  १५   क
स भूमौ निहतः शेते कुरुराजः परैरय़म् ||  १५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति