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सौप्तिक पर्व
अध्याय ९
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सञ्जय़ उवाच
वय़मेव त्रय़ो राजन्गच्छन्तं परमां गतिम् |  ३९   क
यद्वै त्वां नानुगच्छामस्तेन तप्स्यामहे वय़म् ||  ३९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति