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शान्ति पर्व
अध्याय ९
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युधिष्ठिर उवाच
हित्वा ग्राम्यसुखाचारं तप्यमानो महत्तपः |  ४   क
अरण्ये फलमूलाशी चरिष्यामि मृगैः सह ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति