अनुशासन पर्व  अध्याय ९

युधिष्ठिर उवाच

एतन्मे तत्त्वतो व्रूहि धर्मं धर्मभृतां वर |  २   क
प्रतिश्रुत्य दुरात्मानो न प्रय़च्छन्ति ये नराः ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति