menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९
chevron_left
chevron_right
अग्निरु उवाच
यत्र शर्यातिं च्यवनो याजय़िष्य; न्सहाश्विभ्यां सोममगृह्णदेकः |  ३१   क
तं त्वं क्रुद्धः प्रत्यषेधीः पुरस्ता; च्छर्यातिय़ज्ञं स्मर तं महेन्द्र ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति