menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९
chevron_left
chevron_right
अग्निरु उवाच
ततो रोषात्सर्वतो घोररूपं; सपत्नं ते जनय़ामास भूय़ः |  ३३   क
मदं नामासुरं विश्वरूपं; यं त्वं दृष्ट्वा चक्षुषी संन्यमीलः ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति