menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९
chevron_left
chevron_right
अग्निरु उवाच
क्षत्रादेवं व्रह्मवलं गरीय़ो; न व्रह्मतः किञ्चिदन्यद्गरीय़ः |  ३७   क
सोऽहं जानन्व्रह्मतेजो यथाव; न्न संवर्तं गन्तुमिच्छामि शक्र ||  ३७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति