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मौसल पर्व
अध्याय ९
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अर्जुन उवाच
अश्रद्धेय़महं मन्ये विनाशं शार्ङ्गधन्वनः |  १४   क
न चेह स्थातुमिच्छामि लोके कृष्णविनाकृतः ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति