मौसल पर्व  अध्याय ९

अर्जुन उवाच

यः स याति पुरस्तान्मे रथस्य सुमहाद्युतिः |  २०   क
प्रदहन्रिपुसैन्यानि न पश्याम्यहमद्य तम् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति