वन पर्व  अध्याय ९

व्यास उवाच

न मे प्रिय़ं महावाहो यद्गताः पाण्डवा वनम् |  २   क
निकृत्या निर्जिताश्चैव दुर्योधनवशानुगैः ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति