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उद्योग पर्व
अध्याय ९
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शल्य उवाच
उपस्पृश्य ततः क्रुद्धस्तपस्वी सुमहाय़शाः |  ४३   क
अग्निं हुत्वा समुत्पाद्य घोरं वृत्रमुवाच ह |  ४३   ख
इन्द्रशत्रो विवर्धस्व प्रभावात्तपसो मम ||  ४३   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति