menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
सभा पर्व
अध्याय ७२
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
वनं गतेषु पार्थेषु निर्जितेषु दुरोदरे |  १   क
धृतराष्ट्रं महाराज तदा चिन्ता समाविशत् ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति