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शल्य पर्व
अध्याय ९
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सञ्जय़ उवाच
ततः सन्धाय़ नाराचं रुक्मपुङ्खं शिलाशितम् |  २७   क
धनुश्चिच्छेद राजेन्द्र सत्यसेनस्य पाण्डवः ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति