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शल्य पर्व
अध्याय ९
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सञ्जय़ उवाच
आपतन्तं च सहसा पाण्डवानां महद्वलम् |  ५   क
दधारैको रणे शल्यो वेलेवोद्धृतमर्णवम् ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति