आदि पर्व  अध्याय ९०

वैशम्पाय़न उवाच

सार्वभौमः खलु जित्वाजहार कैकेय़ीं सुनन्दां नाम |  १६   क
तस्यामस्य जज्ञे जय़त्सेनः ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति