शान्ति पर्व  अध्याय ९०

भीष्म उवाच

ये चरा ह्यचरानद्युरदंष्ट्रान्दंष्ट्रिणस्तथा |  २०   क
आशीविषा इव क्रुद्धा भुजगा भुजगानिव ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति