अनुशासन पर्व  अध्याय ९०

भीष्म उवाच

उभौ हिनस्ति न भुनक्ति चैषा; या चानृचे दक्षिणा दीय़ते वै |  ४१   क
आघातनी गर्हितैषा पतन्ती; तेषां प्रेतान्पातय़ेद्देवय़ानात् ||  ४१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति