आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ९०

वैशम्पाय़न उवाच

स प्रविश्य यथान्याय़ं पाण्डवानां निवेशनम् |  १   क
पितामहीमभ्यवदत्साम्ना परमवल्गुना ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति