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वन पर्व
अध्याय १४५
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वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणांश्चापि तान्सर्वान्समुपादाय़ राक्षसाः |  ९   क
निय़ोगाद्राक्षसेन्द्रस्य जग्मुर्भीमपराक्रमाः ||  ९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति