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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १८
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अर्जुन उवाच
भीष्मादीनां च सर्वेषां सुहृदामुपकारिणाम् |  ४   क
मम कोशादिति विभो मा भूद्भीमः सुदुर्मनाः ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति