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द्रोण पर्व
अध्याय ९०
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सञ्जय़ उवाच
सहदेवस्तु विंशत्या धर्मराजश्च पञ्चभिः |  ११   क
शतेन नकुलश्चापि हार्दिक्यं समविध्यत ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति