menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय १५७
chevron_left
chevron_right
जनमेजय़ उवाच
एतदिच्छाम्यहं श्रोतुं विस्तरेण तपोधन |  ५   क
न हि मे शृण्वतस्तृप्तिरस्ति तेषां विचेष्टितम् ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति