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शान्ति पर्व
अध्याय ९१
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उतथ्य उवाच
यस्मिन्धर्मो विराजेत तं राजानं प्रचक्षते |  १२   क
यस्मिन्विलीय़ते धर्मस्तं देवा वृषलं विदुः ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति