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शान्ति पर्व
अध्याय ९१
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उतथ्य उवाच
धर्मे वर्धति वर्धन्ति सर्वभूतानि सर्वदा |  १४   क
तस्मिन्ह्रसति हीय़न्ते तस्माद्धर्मं प्रवर्धय़ेत् ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति