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शान्ति पर्व
अध्याय ९१
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उतथ्य उवाच
अरक्षितात्मा यो राजा प्रजाश्चापि न रक्षति |  ३६   क
प्रजाश्च तस्य क्षीय़न्ते ताश्च सोऽनु विनश्यति ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति