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भीष्म पर्व
अध्याय ९१
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सञ्जय़ उवाच
जग्राह विपुलं शूलं गिरीणामपि दारणम् |  ५७   क
नागं जिघांसुः सहसा चिक्षेप च महावलः |  ५७   ख
सविष्फुलिङ्गज्वालाभिः समन्तात्परिवेष्टितम् ||  ५७   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति