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द्रोण पर्व
अध्याय ९१
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सञ्जय़ उवाच
लज्जय़ावनते चापि प्रहृष्टैश्चैव तावकैः |  २   क
द्वीपो य आसीत्पाण्डूनामगाधे गाधमिच्छताम् ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति