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द्रोण पर्व
अध्याय ९१
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सञ्जय़ उवाच
तस्मिन्द्रुते गजानीके जलसन्धो महारथः |  २४   क
यत्तः सम्प्रापय़न्नागं रजताश्वरथं प्रति ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति