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द्रोण पर्व
अध्याय ९१
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सञ्जय़ उवाच
क्षुरप्रेण च पीतेन मुष्टिदेशे महद्धनुः |  ३६   क
जलसन्धस्य चिच्छेद विव्याध च त्रिभिः शरैः ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति