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द्रोण पर्व
अध्याय ९१
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सञ्जय़ उवाच
स निर्भिद्य भुजं सव्यं माधवस्य महारणे |  ३८   क
अभ्यगाद्धरणीं घोरः श्वसन्निव महोरगः ||  ३८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति