वन पर्व  अध्याय ३१

द्रौपद्यु उवाच

अन्यथा परिदृष्टानि मुनिभिर्वेददर्शिभिः |  ३२   क
अन्यथा परिवर्तन्ते वेगा इव नभस्वतः ||  ३२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति