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शल्य पर्व
अध्याय ३६
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वैशम्पाय़न उवाच
तत्र देवाः सगन्धर्वा मासि मासि जनेश्वर |  ५   क
अभिगच्छन्ति तत्तीर्थं पुण्यं व्राह्मणसेवितम् ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति