आदि पर्व  अध्याय ९२

वैशम्पाय़न उवाच

स राजा रतिसक्तत्वादुत्तमस्त्रीगुणैर्हृतः |  ४२   क
संवत्सरानृतून्मासान्न वुवोध वहून्गतान् ||  ४२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति