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अनुशासन पर्व
अध्याय ९२
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भीष्म उवाच
ऋषय़ो धर्मनित्यास्तु कृत्वा निवपनान्युत |  २   क
तर्पणं चाप्यकुर्वन्त तीर्थाम्भोभिर्यतव्रताः ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति