वन पर्व  अध्याय ९२

लोमश उवाच

यथा चेक्ष्वाकुरचरत्सपुत्रजनवान्धवः |  २०   क
मुचुकुन्दोऽथ मान्धाता मरुत्तश्च महीपतिः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति