वन पर्व  अध्याय ९२

लोमश उवाच

मय़ा हि दृष्टा दैतेय़ा दानवाश्च महीपते |  ५   क
वर्धमाना ह्यधर्मेण क्षय़ं चोपगताः पुनः ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति