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उद्योग पर्व
अध्याय ९२
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वैशम्पाय़न उवाच
उत्तिष्ठति महाराजे धृतराष्ट्रे जनेश्वरे |  ३६   क
तानि राजसहस्राणि समुत्तस्थुः समन्ततः ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति