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भीष्म पर्व
अध्याय ९२
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सञ्जय़ उवाच
नानाविधानि शस्त्राणि विसृज्य पतिता नराः |  ५३   क
जीवन्त इव दृश्यन्ते गतसत्त्वा महारथाः ||  ५३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति