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भीष्म पर्व
अध्याय ९२
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सञ्जय़ उवाच
एवमेते महासेने मृदिते तत्र भारत |  ७६   क
परस्परं समासाद्य तव तेषां च संय़ुगे ||  ७६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति