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द्रोण पर्व
अध्याय ९२
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सञ्जय़ उवाच
नागं मणिमय़ं चैव शरैर्ध्वजमपातय़त् |  २१   क
हत्वा तु चतुरो वाहांश्चतुर्भिर्निशितैः शरैः |  २१   ख
सारथिं पातय़ामास क्षुरप्रेण महाय़शाः ||  २१   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति